*नन्ही समन फातिमा के अटूट जज्बे को सलाम: 8 साल की उम्र में रखे मुकम्मल 30 रोज़े*
कोंडागांव: इबादत और बरकतों के महीने रमजान में जहाँ बड़े-बुजुर्गों के लिए कड़ी धूप और गर्मी में रोज़ा रखना चुनौतीपूर्ण होता है, वहीं कोंडागांव की एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची ने अपनी आस्था और दृढ़ संकल्प से सबको हैरान कर दिया है।
कोंडागांव के गांधी वार्ड की रहने वाली समन फातिमा (पिता मोहम्मद शाहरुख) ने इस साल रमजान के पाक महीने में पूरे 30 रोज़े रखकर एक मिसाल पेश की है।
बचपन की जिद और खुदा की इबादत
समन फातिमा की उम्र महज 8 साल है, लेकिन उनके हौसले किसी बड़े से कम नहीं रहे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, समन ने बचपन की मासूमियत और खुदा के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते पूरे महीने रोज़ा रखने का फैसला किया था। भीषण गर्मी के बावजूद, इस नन्ही बच्ची ने भोर की ‘सहरी’ से लेकर शाम की ‘इफ्तार’ तक पूरी शिद्दत के साथ नियमों का पालन किया।
*परिवार और समाज में खुशी का माहौल*
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समन की इस उपलब्धि पर उनके पिता मोहम्मद शाहरुख और पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। गांधी वार्ड के निवासियों ने भी बच्ची के धैर्य और लगन की सराहना की है।
*पिता का संदेश*
मोहम्मद शाहरुख ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि इतनी कम उम्र में समन ने दीन की राह पर चलते हुए बिना किसी नागे के सारे रोज़े पूरे किए।
*एक प्रेरणादायक संदेश*
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे कुछ ही रोज़े रखकर छोड़ देते हैं, लेकिन समन फातिमा की यह मुकम्मल इबादत यह संदेश देती है कि यदि इरादा नेक और पक्का हो, तो उम्र मायने नहीं रखती। समन की इस कामयाबी पर स्थानीय लोगों ने उन्हें दुआएं और मुबारकबाद दी है।






