केशकाल बायपास के लिए काटे गए पेड़ों का हिसाब सार्वजनिक करे वन विभाग:पूर्व वरिष्ठ पार्षद सगीर खान केशकाल।
केशकाल बायपास निर्माण के लिए की गई वन कटाई को लेकर पूर्व वरिष्ठ पार्षद सगीर खान ने केशकाल वनमंडलाधिकारी से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि बायपास निर्माण के लिए वनों की कटाई से पहले एनएचडीपी द्वारा वन विभाग को राशि दी गई होगी। साथ ही पेड़ों की गणना और मापन की प्रक्रिया भी पूरी की गई होगी। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कटाई से कितनी लकड़ी प्राप्त हुई और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।
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[wonderplugin_carousel id="2"]पूर्व वरिष्ठ पार्षद सगीर खान ने वन विभाग से सवाल किया है कि क्या पेड़ों की कटाई से पहले उनका सही मापन और गणना की गई थी? कटाई से कुल कितने घनमीटर लकड़ी प्राप्त हुई तथा उसमें इमारती और जलाऊ लकड़ी की मात्रा कितनी-कितनी थी? कटाई से प्राप्त लकड़ियों को कहां रखा गया और किस वन काष्ठागार में जमा कराया गया?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कटाई से प्राप्त शत-प्रतिशत लकड़ी वन काष्ठागार तक पहुंची या इसमें से कुछ लकड़ी अवैध रूप से बेचे जाने की आशंका की जांच की गई है? इसके अलावा, कटाई का कार्य वन विभाग ने स्वयं कराया था या किसी ठेकेदार के माध्यम से करवाया गया था? यदि ठेकेदार को कार्य सौंपा गया था, तो भुगतान की प्रक्रिया क्या रही?
सगीर खान ने वन विभाग से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि केशकाल बायपास के लिए पेड़ों की कटाई के एवज में एनएचडीपी द्वारा वन विभाग को कुल कितनी राशि दी गई थी और इस राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया।
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[wonderplugin_carousel id="2"]उन्होंने कहा कि वनमंडलाधिकारी को इन सभी सवालों का बिंदुवार जवाब देना चाहिए, ताकि वन कटाई और उससे प्राप्त लकड़ी के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सके।
आगे किन मुद्दों पर उठेंगे सवाल?
सगीर खान ने कहा कि वन कटाई से संबंधित सवालों के जवाब मिलने के बाद वन विभाग की जैम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी, स्वीकृत नियमित एपीओ, कैंपा एपीओ तथा चक्रीय निधि की राशि के उपयोग और कथित दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों पर भी सवाल पूछे जाएंगे।
अब देखना होगा कि केशकाल वनमंडलाधिकारी इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं और वन कटाई से संबंधित अभिलेखों की जानकारी सार्वजनिक की जाती है या नहीं।
