दिनांक 13.03.2026
*शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोण्डागांव में “श्री अन्न (मिलेट) पोषण मेला” का आयोजन*
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शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोण्डागांव की प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के निर्देशन में छत्तीसगढ़ शासन की रुसा 2.0 योजना द्वारा प्रायोजित “श्री अन्न (मिलेट) पोषण मेला” का आयोजन महाविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग एवं रुसा इकाई के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन में मिलेट (श्री अन्न) के पोषणात्मक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा पारंपरिक खाद्यान्नों के उपयोग को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत सीईओ श्री अविनाश भोई तथा मुख्य स्रोत वक्ता के रूप में शासकीय राजीव लोचन महाविद्यालय राजिम के सहायक प्राध्यापक डॉ. भानु प्रताप नायक उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना का वाचन कार्यक्रम की समन्वयक नेहा बंजारे द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने श्री अन्न के महत्व, कार्यक्रम के उद्देश्य तथा आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम ने कहा कि मिलेट केवल पारंपरिक अनाज ही नहीं बल्कि भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न हैं। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में मिलेट का नियमित सेवन अनेक रोगों से बचाव में सहायक है तथा इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सीईओ श्री अविनाश भोई ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में मिलेट पारंपरिक कृषि और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिलेट कम पानी में भी आसानी से उगाए जा सकते हैं और इनमें भरपूर पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इनके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने अपने संबोधन में कहा कि मिलेट को “श्री अन्न” के रूप में बढ़ावा देना भारत की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मिलेट में प्रचुर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मिलेट व्यंजनों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को पोषण एवं नवाचार की दिशा में प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा मिलेट आधारित व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिनका निरीक्षण मुख्य अतिथि कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने किया और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। इन स्टॉलों में विद्यार्थियों द्वारा रागी के लड्डू, रागी की खीर, रागी की बर्फी, चीला, अरसा, रागी की ठंडाई, कोदो की लापसी, मड़िया पेज, कोदो की खीर, कोदो-कुटकी की इडली, मक्का रोटी तथा खट्टाभाजी का शरबत जैसे पौष्टिक व्यंजन प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में मुख्य स्रोत वक्ता डॉ. भानु प्रताप नायक ने मिलेट्स के पोषणात्मक एवं औषधीय महत्व पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मिलेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने मिलेट में पाए जाने वाले पोषक तत्वों, उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव तथा संतुलित आहार में उनकी उपयोगिता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया।
तकनीकी सत्र के अगले खंड में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र वाचन किया गया। इस सत्र में हिंदी विभाग से वंदना सार्वा एवं यमुना नेताम, अर्थशास्त्र विभाग से शोधार्थी प्रेमजीत, शैनू शोरी, गोविंद दयाल तथा अतिथि व्याख्याता आदर्श वैष्णव ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। शोध पत्र वाचन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान —एमए हिंदी चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा यमुना नेताम, द्वितीय स्थान —शोधार्थी प्रेमजीत और तृतीय स्थान —अतिथि व्याख्याता आदर्श वैष्णव ने प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आकाश वासनीकर द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम के संयोजक शशिभूषण कन्नौजे ने आभार प्रदर्शन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. देवाशीष हालदार, शोभाराम यादव, शशिभूषण कन्नौजे, रूपा सोरी, नसीर अहमद, विनय कुमार देवांगन, नेहा बंजारे, डॉ. आकाश वासनीकर, अर्जुन सिंह नेताम, समलेश पोटाई, लोचन सिंह वर्मा, क्रीड़ाधिकारी हुमन राम यदु, अतिथि व्याख्याता तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।






