केशकाल विधानसभा में शराब बिक्री पर गंभीर सवाल, क्या कुंभकर्णी नींद में सोया है आबकारी विभाग? : सगीर ख़ान
शासकीय विदेशी मदिरा दुकान में निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने का आरोप, गांव-गांव अवैध बिक्री का नेटवर्क सक्रिय होने की चर्चा; जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग
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केशकाल। केशकाल विधानसभा क्षेत्र में शासकीय विदेशी मदिरा दुकानों के संचालन, शराब की बिक्री में निर्धारित दरों के पालन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शासकीय विदेशी मदिरा दुकान में उपभोक्ताओं से शासन द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है। वहीं, क्षेत्र के गांवों और गली-मोहल्लों तक बिचौलियों के माध्यम से विदेशी शराब पहुंचने और उसकी बिक्री किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
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[wonderplugin_carousel id="2"]निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, आखिर किसकी जिम्मेदारी?
शासकीय शराब दुकानों में शराब की बिक्री निर्धारित दरों के अनुसार होना आवश्यक है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि उपभोक्ताओं से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि ली जा रही है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या दुकान के संचालन की नियमित निगरानी की जा रही है? क्या अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मूल्य सूची, बिक्री पंजी और स्टॉक का सत्यापन किया जाता है? यदि ऐसी जांच होती है, तो कथित अनियमितताओं पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है?
शराब खरीदने वाले कई उपभोक्ता सामाजिक झिझक अथवा अन्य कारणों से शिकायत करने से बचते हैं। ऐसी स्थिति में विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह स्वयं दुकानों की जांच करे और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की शिकायतों का निष्पक्ष सत्यापन करे। उपभोक्ताओं की चुप्पी को नियमों के उल्लंघन की छूट नहीं माना जा सकता।
गांव-गांव तक विदेशी शराब पहुंचने के आरोप, विभाग की नजर कहां?
केशकाल विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से विदेशी शराब की बिक्री होने की शिकायतों ने भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यदि शासकीय शराब दुकानों से बड़ी मात्रा में शराब खरीदकर उसे गांवों में नियमविरुद्ध बेचा जा रहा है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि शराब कहां से खरीदी जा रही है, किस माध्यम से गांवों तक पहुंच रही है और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गांवों में अवैध शराब बिक्री का नेटवर्क सक्रिय है, तो संबंधित आबकारी अमला इसकी जानकारी जुटाने और कार्रवाई करने में कितना प्रभावी साबित हो रहा है?
क्या विभाग को केवल छोटे स्तर पर महुआ शराब बनाने या बेचने की शिकायतें ही दिखाई देती हैं, जबकि विदेशी शराब की कथित अवैध बिक्री और आपूर्ति की जांच पर्याप्त गंभीरता से नहीं की जा रही? यदि ऐसा कोई अंतर है, तो इसकी वजह स्पष्ट होनी चाहिए। कानून का पालन सभी मामलों में समान रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हालांकि, गांवों में विदेशी शराब की बिक्री और उसका शासकीय दुकानों से संबंध होने के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए यह पता लगाना आवश्यक है कि शराब की आपूर्ति किन स्रोतों से हो रही है और क्या इसमें निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
जिला आबकारी अधिकारी की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में जिला आबकारी अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग के पास दुकानों के स्टॉक, बिक्री, खरीद और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली और गांवों में कथित अवैध बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो विभाग को अपनी कार्रवाई और जांच व्यवस्था के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्या जिला आबकारी विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा है? क्या शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई होती है? क्या संबंधित दुकानों के स्टॉक और बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है?
इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है। यदि विभाग की निगरानी में कोई कमी पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप निराधार हैं, तो निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति भी सामने लाई जानी चाहिए।
मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं निगरानी में लापरवाही तो नहीं हो रही। हालांकि, किसी अधिकारी पर मिलीभगत या आर्थिक लेन-देन का आरोप बिना प्रमाण के सही नहीं माना जा सकता। ऐसे किसी संदेह की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही उचित रास्ता है।
स्टॉक और बिक्री पंजी की उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन से मांग की गई है कि केशकाल विधानसभा क्षेत्र की संबंधित शासकीय विदेशी मदिरा दुकानों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए। समिति में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया जाए जो संबंधित दुकान के नियमित संचालन और स्थानीय स्तर की कार्यप्रणाली से सीधे तौर पर जुड़े न हों, ताकि जांच निष्पक्ष रह सके।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए—
1. स्टॉक का भौतिक सत्यापन: दुकान के वास्तविक स्टॉक और अभिलेखों में दर्ज मात्रा का मिलान किया जाए।
2. खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की जांच: निर्धारित अवधि के बिक्री पंजी, खरीद संबंधी अभिलेखों और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाए।
3. निर्धारित मूल्य की जांच: विभिन्न ब्रांडों की अधिकृत मूल्य सूची और उपभोक्ताओं से ली जा रही राशि का सत्यापन किया जाए।
4. अवैध आपूर्ति की पड़ताल: गांवों में विदेशी शराब की कथित बिक्री के स्रोतों और आपूर्ति की श्रृंखला की जांच की जाए।
5. निरीक्षण और कार्रवाई का रिकॉर्ड: संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण, प्राप्त शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई की समीक्षा हो।
6. जिम्मेदारी तय की जाए: अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की चुप्पी नहीं, पारदर्शी कार्रवाई जरूरी
शराब की बिक्री से शासन को राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन राजस्व के साथ नियमों का पालन, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और अवैध बिक्री पर नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि शासकीय दुकान में निर्धारित दर से अधिक राशि वसूले जाने अथवा शराब की अवैध आपूर्ति की शिकायतें हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
जिला प्रशासन और आबकारी विभाग को चाहिए कि वे शिकायतों की गंभीरता से जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखें। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदारी के स्तर के अनुरूप तय की जाए।
अब सवाल यह नहीं है कि शिकायतें क्यों उठ रही हैं, बल्कि यह है कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कब होगी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी?
केशकाल विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को इस मामले में स्पष्ट जवाब और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा है। जिला प्रशासन द्वारा उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर शासकीय विदेशी मदिरा दुकानों के स्टॉक, बिक्री पंजी, निर्धारित मूल्य और कथित अवैध आपूर्ति की निष्पक्ष जांच कराना आवश्यक है, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
