
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
[wonderplugin_carousel id="2"]केशकाल विश्रामपुर चौक से भारत माला जोड़ ने वाली सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, धूल से जनता परेशान; पूर्व वरिष्ट पार्षद सगीर खान ने एस्टीमेट माप पुस्तिका को देख कर आगे की सवाल जाए गे वही उच्च अधिकारी ने फोन पर सोमवार को देने की बात की है।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
[wonderplugin_carousel id="2"]
विश्रामपुरी चौक से जिओ पेट्रोल पंप तक सड़क निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं का आरोप, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता कोण्डागांव से जांच कराने की मांग
केशकाल, जिला कोण्डागांव। केशकाल के विश्रामपुरी चौक से जिओ पेट्रोल पंप तक सड़क निर्माण कार्य को लेकर अब गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। सड़क निर्माण कार्य अधूरा होने तथा नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं किए जाने के कारण क्षेत्र में धूल के गुबार उड़ रहे हैं। इससे राहगीरों, बाइक चालकों, साइकिल सवारों और स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पूर्व वरिष्ठ सगीर खान ने सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
धूल के गुबार से आम जनता परेशान
स्थानीय मार्ग पर वाहनों की आवाजाही के दौरान लगातार धूल उड़ने से लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। धूल के कारण सामने से आने वाले वाहनों को देखना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। लगातार धूल के संपर्क में आने से लोगों को खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का खतरा भी रहता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि निर्माण कार्य के दौरान धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव क्यों नहीं कराया जा रहा है। सड़क निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की ओर से आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, यह भी जांच का विषय है।
पूर्व वरिष्ठ सगीर खान ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
पूर्व वरिष्ठ सगीर खान ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से जीएसबी (GSB) कार्य की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग तथा डामरीकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री, निर्धारित मोटाई, मिश्रण और तापमान जैसे तकनीकी मानकों का पालन बेहद जरूरी है। यदि इन मानकों की अनदेखी होती है, तो सड़क की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
एस्टीमेट और एमबी बुक की जांच की मांग
इस मामले में सगीर खान ने लोक निर्माण विभाग, कोण्डागांव के कार्यपालन अभियंता से पत्राचार कर सड़क निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि केवल कागजों में दर्ज कार्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक निर्माण कार्य का परीक्षण किया जाना चाहिए।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं का परीक्षण किए जाने की मांग की गई है—
प्राक्कलन (एस्टीमेट): स्वीकृत राशि, सड़क की लंबाई-चौड़ाई, निर्धारित मोटाई और निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री की जानकारी।
माप पुस्तिका (एमबी बुक): विभागीय अभिलेखों में दर्ज माप और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण कार्य का मिलान।
जीएसबी कार्य की गुणवत्ता: उपयोग की गई सामग्री, निर्धारित मोटाई और तकनीकी मानकों के पालन की जांच।
डामरीकरण की प्रक्रिया: हॉट मिक्सिंग, मिश्रण के तापमान तथा अन्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुपालन की जांच।
निर्माण सामग्री की जांच: आवश्यकतानुसार सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण।
गुणवत्ता नियंत्रण: संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट की जांच।
धूल नियंत्रण: निर्माण कार्य के दौरान नियमित पानी का छिड़काव और आम जनता की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों की समीक्षा।
इन बिंदुओं पर जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है या नहीं।
मौके पर जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
पूर्व वरिष्ठ सगीर खान की मांग है कि संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों को मौके पर भेजकर सड़क निर्माण की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए। इसके साथ ही एस्टीमेट, एमबी बुक और मौके पर किए गए कार्य का तुलनात्मक परीक्षण किया जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की कमी या अनियमितता सामने आती है, तो उसके लिए जिम्मेदारी निर्धारित की जा सके।
उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता से संबंधित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाए। यदि तकनीकी जांच में निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
अब लोक निर्माण विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
केशकाल के इस मार्ग पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता और धूल की समस्या को लेकर उठे सवालों के बीच अब लोक निर्माण विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि विभाग निष्पक्ष तकनीकी जांच कराता है, तो निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लोक निर्माण विभाग, कोण्डागांव के कार्यपालन अभियंता इस मामले में जांच के निर्देश देंगे? क्या एस्टीमेट और एमबी बुक का मौके पर हुए वास्तविक कार्य से मिलान किया जाएगा? और यदि निर्माण कार्य में कमियां पाई जाती हैं, तो जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
फिलहाल, मामले में विभागीय जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही सड़क निर्माण की गुणवत्ता
को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
